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जिसका वजूद नहीं, वह हस्ती किस काम की,जो मजा न दे, वह मस्ती किस काम की,जहाँ दिल न लगे, वो बस्ती किस काम की,हम आपको याद न करें, तो फिर ये मोहब्बत किस काम की।
वजह पूछोगे तो उम्र गुजर जायेगी,
कहा ना अच्छे लगते हो तो बस लगते हो।
सफर वहीं तक है जहाँ तक तुम हो,नजर वहीं तक है जहाँ तक तुम हो,हजारों फूल देखे हैं इस गुलशन में मगर,खुशबू वहीं तक है जहाँ तक तुम हो।
फिर इश्क़ का जूनून चढ़ रहा है सिर पे,मयख़ाने से कह दो दरवाज़ा खुला रखे।
हम जिनके दीवाने है वो गैरों के गुण गाते थे,
हमने कहा आपके बिन जी ना सकेंगे,
तो हंस के कहने लगे,के जब हम ना थे तब भी तो जीते थे..
आपने कहा मोहब्बत पूरी नहीं होती |
हम कहते हैं हर बार ये बात जरुरी नहीं होती ||
मोहब्बत तो वो भी करते हैं उनसे......|जिन्हें पाने की कोई उम्मीद नहीं होती ||
राह तकते है हम उनके इंतज़ार में,
साँसे भरते हैं उनके एक दीदार में,
रात न कटती है न होता है सवेरा,जबसे दिल के हर कोने में हुआ है आपका बसेरा.
दिल में कोई और बसा तो नहीं,ये चाहत इश्क की ज्यादा तो नहीं,सब मुझे चाहने लगे हैं....,कहीं मुझ में तुम्हारे जैसी कोई अदा तो नहीं.
बेशक वो नहीं करते बात कभीफिर उनसे मिलने को दिल बेकरार क्यों हैउनकी याद तो अब रात को सोने भी नहीं देतीजाने हमको उनसे इतना प्यार क्यों है
जो रहते हैं दिल में,
वो जुदा नही होते,
कुछ अहसास लफ़्ज़ों में बयान नही होते,एक हसरत है उन्हे मानने की,वो इतने अच्छे हैं कि कभी खफा ही नही होते..
रस्मों रिवाज की जो परवाह करते हैं,प्यार में वो लोग गुनाह करते हैंइश्क वो जुनून है जिसमें दीवानेअपनी खुशी से खुद को तबाह करते हैं।
नही है हमारा हाल, कुछ तुम्हारे हाल से अलग, बस फ़र्क है इतना, कि तुम याद करते हो, और हम भूल नही पाते.
तुझसे मिलने की बेताबी का वो अंजाम कैसे भुलादूँ,तेरे लवो की हँसी और आँखों की जाम कैसे भुलादूँ,दिल तो हमारा भी तड़पता हैं तेरा साथ पाने को,पर इस जहाँ के रश्मो - रिवाज कैसे भुलादूँ.
तुझसे मिलने की बेताबी का वो अंजाम कैसे भुलादूँ,तेरे लवो की हँसी और आँखों की जाम कैसे भुलादूँ,दिल तो हमारा भी तड़पता हैं तेरा साथ पाने को,पर इस जहाँ के रश्मो - रिवाज कैसे भुलादूँ.
प्यार किया तो उनकी मोहबत नज़र आई, दर्द हुआ हमे तो पलके उनकी भर आई. दो दिलों की धड़कन में एक बात नज़र आई, दिल तो उनका धड़का पर आवाज़ इस दिल से आई.
तेरी आरज़ू मेरा ख्वाब है,जिसका रास्ता बहुत खराब है,मेरे ज़ख़्म का अंदाज़ा ना लगा,दिल का हर पन्ना दर्द की किताब है.
आँखों के सामने हर पल आपको पाया हैं,अपने दिल में भी सिर्फ आपको ही बसाया हैं,आपके बिना हम जिए भी तो कैसे........,भला जान के बिना भी कोई जी पाया हैं.
जब आप किसी को चाहो तो ऎ मत सोचो की,
वो आप को पसंद करता है की नही,
बस उसॆ इतना चाहो की उसॆ आप कॆ सिवा,
किसी और की चाहत पसंद ही ना आए ...
तुझको मिल जायेगा बेहतर मुझसे,मुझको मिल जायेगा बेहतर तुझसे,फिर भी दिल में एक ख्याल आता हैं,जानी तू जो मिल जाए तो बेहतर हैं सबसे.
हमारा हर लम्हा चुरा लिया आपने, आँखों को इक चाँद दिखा दिया आपने.हमॆ ज़िंदगी दि किसी और नॆ, पर प्यार इतना दॆखकर जीना सिखा दिया आपने.
लोग पूछते हैं की तुम क्यूँ अपनी मोहब्बत, का इज़हार नहीं करते, हमने कहा जो लब्जों में बयां, हो जाये सिर्फ उतना हम किसी से प्यार नहीं करते.
तकदीर ने जैसा चाहा ढल गये हम,यूं तो संभल कर चले थे फिर भी फिसल गये हम,अपना यकीन है कि दुनिया बदल गयी,पर सबका खयाल है कि बदल गये हम.
हर नज़र को एक नज़र की की तलाश है,हर दिल में छुपा एक एहसास है |आप से प्यार युही नही किया हमने क्या करे हमारी पसंद ही कुछ ख़ास है
वो वक्त वो लम्हे अजीब होंगे,
दुनियाँ में हम खुश नशीब होंगे,
दूर से जब इतना याद करते हैं आपको,
क्या हाल होगा जब आप हमारे करीब होगे.
इश्क़ ऐसा करो कि धड़कन मे बस जाए,सांस भी लो तो खुश्बू उसी की आए, प्यार का नशा आँखो पे ऐसा छाए, बात कोई भी हो,पर नाम उसी का आए.
आँखों में तेरी डूब जाने को दिल चाहता है, इश्क में तेरे बर्बाद होने को दिल चाहता है, कोई संभाले मुझे, बहक रहे है मेरे कदम, वफ़ा में तेरी मर जाने को दिल चाहता है
हर वक्त मुस्कुराना फिदरत हैं हमारी,आप यूँ ही खुश रहे हसरत हैं हमारी,आपको हम याद आये या ना आये,आपको याद करना आदत हैं हमारी.
क्यों कोई अच्छा लगने लगता है, आहिस्ता - आहिस्ता ;खुमार इश्क का चढ़ता है क्यों, आहिस्ता - आहिस्ता .सफर में ज़िन्दगी के,लोग तो बहुत मिलते ;दिल में बस जाता कोई शख्स क्यों, अहिस्ता - आहिस्ता
हर नज़र को 1 निगाह का हक़ है,हर नूर को 1 आह का हक़ है.हम भी दिल लेकर आये है इस दुनिया में,हमे भी तो 1 गुनाह करने का हक़ है
ख्वाबो में मेरे आप रोज आते हो,कभी दर्द, कभी खुशियाँ दे जाते हो,कितना प्यार करते हो आप मुझ से,शिर्फ़ मेरे इस सवाल का जबाब टाल जाते हो.
वो जो हमसे नफरत करते हैं,हम तो आज भी सिर्फ उन पर मरते हैं,नफरत है तो क्या हुआ यारो,कुछ तो है जो वो सिर्फ हमसे करते हैं।
याद तो हर कोई करेगा जाने के बाद,सच्चे प्यार का पता चल जाएगा वख्त आने के बाद,कौन कितनी मुहोब्बत करता है,
नजर आएगा मर जाने के बाद |
ना दिल से होता है, ना दिमाग़ से होता है, ये प्यार तो इतफाक से होता है, पर प्यार कर के प्यार ही मिले, ये इतफाक किसी-किसी के साथ होता है.
न तस्वीर है आपकी जो दीदार किया जाये, न आप पास हो जो प्यार किया जाये, ये कैसा दर्द दिया है|न कुछ कहा जाये, न कुछ सुना जाये|
जब उसकी धुन में रहा करते थे,हम भी चुप चुप जिया करते थेलोग आते थे गजल सुंनाने,हम उसकी बात किया करते थेघर की दीवार सजाने के खातिर,हम उसका नाम लिखा करते थे,कल उसको देख कर याद आया हमे,हम भी कभी मोहोब्बत किया करते थे,लोग मुझे देख कर उसका नाम लिया करते थे


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